वैज्ञानिक पद्धति क्या है इसके प्रमुख चरणों की व्याख्या कीजिए।
- वैज्ञानिक पद्धति क्या है? इसके प्रमुख चरणों की व्याख्या कीजिए।
- (What is scientific method? Describe its main steps)
- वैज्ञानिक पद्धति की व्याख्या कीजिए।
- (Explain scientific method)
- समाजशास्त्रीय अनुसन्धान में वैज्ञानिक पद्धति के महत्त्व की विवेचना कीजिए।
- (Discuss the importance of scientific method in social research.)
- वैज्ञानिक पद्धति क्या है ? सामाजिक अनुसन्धान में वैज्ञानिक पद्धति की उपयोगिताओं और विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- (What is scientific method ? Describe of the utility and features of the scientific method in social research.)
- वैज्ञानिक पद्धति क्या है? इसके प्रमुख चरणों की व्याख्या कीजिए।
- (What is scientific method? Explain its main stages)
- विज्ञान से आप क्या समझते हैं? सामाजिक विज्ञान में सामाजिक घटनाओं की विशेषता का वर्णन कीजिए।
- (What do you understand by science? Describe the characteristics of social phenomena in social science) अथवा (पं रविशंकर शुक्न वि. वि. 2018, 19)
- वैज्ञानिक पद्धति क्या है? इसके महत्त्व की विवेचना कीजिए।
- (What is scientific method? Discuss its importance.)
- सामाजिक शोध में वैज्ञानिक पद्धति की उपयोगिता का मूल्याकन कीजिए।
- (Evaluate the utility of the scientific method in social research.)
वैज्ञानिक पद्धति का आशय (Meaning of Scientific Methodology)
वैज्ञानिक पद्धति क्या है इसके प्रमुख चरणों की व्याख्या कीजिए। सामान्यतः विज्ञान किसी विषय के बारे में क्रमबद्ध ज्ञान को कहते हैं। विज्ञान सम्पूर्ण अनुभव किये जाने वाले एवं समझने की एक विधि है। यह वह विधि है जिसका लक्ष्य अन्तिम सत्य की खोज करना है अर्थात् तथ्यों, प्रघटनाओं एवं वस्तुओं का विश्लेषण करना है ताकि इनके कार्य-कारण सम्बन्धों का पता लगाया जा सके
विज्ञान की परिभाषाएँ (Definitions of Science)
(1) कार्ल पियर्सन के अनुसार, 'विज्ञान वह विधि है जिससे तथ्यों पर आधारित महत्त्वपूर्ण ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। विज्ञान की वस्तु सम्पूर्ण भौतिक समग्र है, जो व्यक्ति किसी भी प्रकार के तथ्यों का वर्गीकरण करता है, उनके पारस्परिक सम्बन्धों का पता लगाता है तथा उनमें पाये जाने वाले क्रमों का वर्णन करता है, वह वैज्ञानिक विधि का प्रयोग कर रहा है तथा वैज्ञानिक व्यक्ति कहा जा सकता है।"
(2) स्टुअर्ट चेज (Stuart Chase) के अनुसार, "विज्ञान पद्धति के साथ चलता है, विषय-वस्तु के साथ नहीं।"
(3) जॉर्ज ए लुण्डबर्ग (George A Lundberg) के अनुसार, "विस्तृत अर्थ में वैज्ञानिक विधि तथ्यों का व्यवस्थित अवलोकन, वर्गीकरण एवं निर्वचन है।"
स्पष्ट हो जाता है कि विज्ञान तथा वैज्ञानिक विधि किसी तव्य अथवा प्रघटना के बारे में वस्तुनिष्ठ रूप से जानकारी प्राप्त करने का एक तरीका है।
समाजशास्त्र में विज्ञान की विशेषताएँ
(Characteristics of Science in Sociology)
वैज्ञानिक पद्धति क्या है इसके प्रमुख चरणों की व्याख्या कीजिए। समाजशास्त्र में विज्ञान की निम्नलिखित विशेषताएँ पायी जाती हैं-
(1) वैज्ञानिक विधि का प्रयोग (Use of scientific method समाजशास्त्र में सामाजिक सम्बन्धों, सामाजिक अन्तः क्रियाओं, सामाजिक व्यवहार एवं समाज का अध्ययन कल्पना के आधार पर नहीं किया जाता अपितु इनको वास्तविक रूप में वैज्ञानिक विधि द्वारा समझने का प्रयास किया जाता है। वैज्ञानिक विधि द्वारा ही उपकल्पनाओं का परीक्षण एवं सामाजिक नियमों या सिद्धान्तों का निर्माण किया जाता है। समाजशास्त्रीय अध्ययन वैज्ञानिक विधि द्वारा ही किये जाते हैं तथा दुर्खीम, मैक्स वेबर जैसे प्रारम्भिक समाजशास्त्रियों के अध्ययन भी निश्चित रूप से वैज्ञानिक अध्ययनों की श्रेणी में रखे जा सकते हैं। अतः समाजशास्त्र अन्य विज्ञानों की तरह ही एक विज्ञान है।
(2) समाजशास्त्रीय ज्ञान प्रमाण पर आधारित है। Sociological knowledge is based on evidence)- समाजशास्त्री किसी बात को बलपूर्वक मानने के लिए नहीं कहते अपितु तर्क एवं प्रमाणों के आधार पर इसकी व्याख्या करते हैं। समाजशास्त्र में वास्तविक घटनाओं का अध्ययन, अवलोकन या अन्य प्रविधियों द्वारा किया जाता है।
(3) 'क्या है' का अध्ययन (Study of 'what is') - समाजशास्त्र तथ्यों का यथार्थ रूप में वर्णन ही नहीं करता अपितु इनकी व्याख्या भी करता है। इसमें प्राप्त तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर या आदर्श एवं कल्पना से मिश्रित करके प्रस्तुत नहीं किया जाता अपितु वास्तविक घटनाओं (जिस रूप में वे विद्यमान है) का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है।
(4) तथ्यों का वर्गीकरण एवं विश्लेषण (Classification and analysis of facts)- समाजशास्त्र में वैज्ञानिक विधि द्वारा एकत्रित आँकड़ों को व्यवस्थित करने के लिए उनका वैज्ञानिक वर्गीकरण किया जाता है तथा तर्क के आधार पर निर्वचन करके निष्कर्ष निकाले जाते हैं, क्योंकि तथ्यों का वर्गीकरण करना, उनके क्रम का ज्ञान और सापेक्षिक महत्त्व का पता लगाना ही विज्ञान है और इन सब बातों को हम समाजशास्त्रीय विश्लेषण में स्पष्ट देख सकते हैं, अतः समाजशास्त्र एक विज्ञान है।
(5) कार्य-कारण सम्बन्धों की व्याख्या (Explanation of cause-effect relationship- समाजशास्त्र अपनी विषय-वस्तु में कार्य कारण सम्बन्धों की खोज करता है अर्थात् इसका उद्देश्य विभिन्न सामाजिक घटनाओं के बारे में आँकड़े एकत्रित करना ही नहीं है अपितु उनके कार्य-कारण सम्बन्धों, कारणों एवं परिणामों का पता लगाना भी है। प्राकृतिक विज्ञानों में कार्य-कारण सम्बन्धों का निरीक्षण प्रयोगशाला में किया जाता है, परन्तु समाजशास्त्र में यह अप्रत्यक्ष प्रयोगात्मक विधि अर्थात् तुलनात्मक विधि द्वारा ही सम्भव है।
(6) सामान्यीकरण या सिद्धान्त निर्माण का प्रयास (Attempt of generalizations or building a theory) क्योंकि समाजशास्त्र में वैज्ञानिक विधि द्वारा अध्ययन किये जाते हैं तथा सामाजिक वास्तविकता को समझने का प्रयास किया जाता है, इसलिये सामान्यीकरण करने एवं सिद्धान्तों के निर्माण करने के प्रयास भी किये गये है। यद्यपि इसमें एक आधुनिक नियम होने के कारण अधि सफलता नही मिल पायी है। यद्यपि समाजशास्त्र में अधिक सर्वमान्य सिद्धान्तों का निर्माण नहीं कि गया है. परन्तु अनेक सामान्यीकरण किये गये हैं तथा आज हम निरन्तर सिद्धान्तों के निर्माण तरफ आगे चढ़ रहे हैं।
(7) सिद्धान्तों की पुनर्परीक्षा (Re-examining of principles) विज्ञान के लिये यह आवस्यक है कि उसके द्वारा प्रतिपादित नियमों सके का पुनः परीक्षण हो और इस कसौटी पर समाजशास्त्र खर उतरता है। जब किसी समाजशास्त्री द्वारा सिद्धान्त या नियम प्रतिपादित किये जाते हैं।
(8) अविष्यवाणी करने में सक्षम (Capable to make predictions) समाजशास्त्र 'क्या की वैर सकता है कि 'क्या होगा'। क्योंकि कार्य-कारण सम्वन्धों की खोज सम्भव है, अतः उसके आधार पर एक समाजशास्त्री भविष्यवा करो कि कार्य उरण एन के लिए, समाजशास्त्र हमें यह बतलाता है कि अपराध क्या है? इसके सा कर सकता है। टूटा गरे अपराध की दर में वृद्धि हुई तो समाज में इसके क्या परिणाम होंगे ॐ क्या कारण है मगर अपराधार पर भविष्य का पूर्वानुमान लगाने की क्षमता होने के कारण समाजशास्त्र को विज्ञान मानन्ा उचित होगा।
वैज्ञानिक पद्धति का अर्थ एवं परिभाषाएँ
Meaning and Definitions of Scientific Method)
वैज्ञानिक पद्धति क्या है इसके प्रमुख चरणों की व्याख्या कीजिए। (समाजशास्त्र के जन्मदाता अगस्त कॉम्टे के अनुसार वैज्ञानिक पद्धति में धर्म, दर्शन की कल्पना का कोई भी स्थान नहीं है। इसके विपरीत निरीक्षण, परीक्षण, प्रयोग और वर्गीकरण की एक व्यवस्थित कार्य प्रणाली को वैज्ञानिक पद्धति कहते हैं। जहाँ प्राकृतिक विज्ञानों में वैज्ञानिक पद्धति का सहारा लिया जाता है. वहीं सामाजिक विज्ञानों में भी सामाजिक घटनाओं को समझने के लिए इसी पद्धति का प्रयोग किया जाता है। वास्तव में वैज्ञानिक पद्धति की सहायता से सामाजिक घटनाओं को समझने और विषय-सामग्री को प्राप्त करने का प्रयत्न किया जाता है।
तुण्डबर्ग ने वैज्ञानिक पद्धति का अर्थ स्पष्ट करते हुए लिखा है कि "व्यापक अर्थ में वैज्ञानिक पद्धति तव्यों के व्यवस्थित अवलोकन, वर्गीकरण तया व्याख्या (निर्वचन) से निर्मित है।" उन्होंने आगे यह भी लिखा है कि "समाज वैज्ञानिकों में यह दृढ़ विश्वास पाया जाता है कि उनके सम्मुख जो समस्याएँ हैं, उनका समाधान सामाजिक घटनाओं के बुद्धिमत्तापूर्ण और व्यवस्थित अवलोकन सत्यापन, वर्गीकरण तथा विश्लेषण द्वारा ही सम्भव है। अपने यथार्थ (परिशुद्ध) स्वरूप में इसी उपागम को वैज्ञानिक पद्धति कहते हैं।"
वैज्ञानिक पद्धति की कुछ प्रमुख परिभाषाएँ इस प्रकार हैं-
(1) स्टुअर्ट चेज के अनुसार, "विज्ञान का सम्बन्ध पद्धति से है न कि विषय सामग्री से।"
(2 ) प्रो. ग्रीन के अनुसार, "विज्ञान का अर्थ तथ्यों की खोज करने वाले तरीके से लिया जाता है।"
(3) कार्ल पियर्सन के शब्दों में, "सभी विज्ञानों की एकता उसकी पद्धति से है न कि केवल उसकी विषय-वस्तु में।"
(4) बीसेज तथा बीसेज के मतानुसार, "यह एक पद्धति या उपागम है न कि विषय सामग्री जो कि विज्ञान की कसौटी है।"
(5) लैण्डिस के अनुसार, "विज्ञान, विज्ञान ही है, चाहे वह भौतिकवाद में हो या समाजशास्त्र में।"
(6) बर्नार्ड शॉ के अनुसार, "वैज्ञानिक पद्धति में छः मुख्य प्रक्रियाएँ- परीक्षा, सत्यापन, परिभाषा, वर्गीकरण, संगठन तथा अभिविन्यास सम्मिलित हैं। इनमें भविष्यवाणी करना भी सम्मिलित है।"
वैज्ञानिक पद्धति की विशेषताएँ
(Characteristics of Scientific Method)
उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर वैज्ञानिक पद्धति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है-
(1) ज्ञान का आधार (Base of knowledge) सामाजिक घटनाओं को समझने के लिए तव्य एकत्रित किए जाते हैं और इन तथ्यों को एकत्रित करने के लिए समाजमिति, अवलोकन पद्धति, अनुसूची वा प्रश्नावली पद्धति, सामाजिक सर्वेक्षण पद्धति, वैयक्तिक जीवन अध्ययन पद्धति, सांख्यिकी पद्धति, साक्षात्कार पद्धति, ऐतिहासिक पद्धति आदि का सहारा लिया जाता है। इस प्रकार वैज्ञानिक पद्धति की एक विशेषता ज्ञान का आधार होता है।
(2) तथ्यों का वर्गीकरण तथा विश्लेषण (Classification and analysis of facta)- किसी भी वैज्ञानिक निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए प्राप्त तथ्यों को उनमें पाई जाने वाली समानता या विभिन्नता के आधार पर उन्हें वर्गीकृत करके उनका विश्लेषण किया जाता है। वर्गीकरण का कार्य जितनी कुशलता से किया जाता है, वैज्ञानिक निष्कर्ष तक पहुँचा भी शोधकारों के लिए उतना ही सरल हो जाता है। इस प्रकार तथ्यों का वर्गीकरण तथा विश्लेषण भी वैज्ञानिक पद्धति की एक दूसरी विशेषता है।
(3) वस्तुनिष्ठता का गुण (Objectivity) वैज्ञानिक पद्धति में वस्तुनिता पर अधिक बल दिया जाता है। वैज्ञानिक पद्धति वह साधन है जिसकी सहायता से हम वस्तुनिया तथ्यों को एकत्रित कर सकते हैं। वस्तुनिष्ठता का अर्थ है-जैसा है, उसे ठीक उसी रूप में प्रस्तुत करना है। वैज्ञानिक पद्धति में वस्तुनिष्ठता का गुण पाया जाता है, यह इसकी तीसरी विशेषता है।
(4) सिद्धान्तों की पुनर्परीक्षा (Re-examining of principles) वैज्ञानिक पद्धति की यह एका सबसे उल्लेखनीय विशेषता है कि इसके द्वारा प्राप्त निष्कर्ष की किसी भी समय पुनर्परीक्षा (सत्यापन) किया जा सकता है। इस सम्बन्ध में जेम्स लूबर में लिखा है कि जिस पद्धति द्वारा पुनर्परीक्षा सम्भव नहीं, वह वैज्ञानिक पद्धति नहीं हो सकती, वह या तो दार्शनिक या काल्पनिक पद्धति होती है। यह वैज्ञानिक पद्धति की चौथी बड़ी विशेषता है।
(5) भविष्यवाणी करने की क्षमता (Capable to make prediction) वैज्ञानिक पद्धति में भविष्यवाणी करने की क्षमता होती है। यह वैज्ञानिक पद्धति की ची विशेषता है। क्षमता विज्ञान की एक बहुत बड़ी विशेषता मानी जाती है। वैज्ञानिक पद्धति की सहायता से किसी भी घटना के कार्य-कारण सम्बन्धों को जाना जा सकता है। उदाहरणार्थ, भारत में जनसंख्या वृद्धि का एक कारण शीघ्र विवाह और गर्भ निरोधक साधनों को न अपनाना है। इस सम्बन्ध में यह भविष्यवाणी की जा सकती है कि अगर शीघ्र विवाह पर रोक और गर्भ निरोधक साधनों को अपनाना अनिवार्य नहीं किया गया तो भारत में जनसंख्या वृद्धि को भी रोकना कठिन हो जाएगा।
(6) सामान्यता का गुण (Generality) वैज्ञानिक पद्धति में छठी विशेषता सामान्यता की देखने को मिलती है। इस विशेषता को दो अर्थ है-पहला, वैज्ञानिक पद्धति विज्ञान की सभी शाखाओं में सामान्य होती है। दूसरा, वैज्ञानिक पद्धति विषय के सम्बन्ध में एक सामान्य सत्य को दूद्ध निकालने की विधि है। इस सामान्यता का अर्थ केवल इतना ही है कि अन्य अवस्थाएँ या परिस्थितियों यदि पूर्ववत् बनी रहें तो वैज्ञानिक नियम सामान्य रूप में लागू होंगे।
(7) निश्चितता का गुण (Definiteness) वैज्ञानिक पद्धति की सातवी विशेषता उसकी निश्वितता है। वैज्ञानिक पद्धति एक वैज्ञानिक के लिए कुछ और तबा दूसरों के लिए कुछ और हो, ऐसी बात नहीं है। यह तो पूर्ण तथा एक सुनिश्चित पद्धति है जिसकी सहायता से कोई भी वैज्ञानिक अपनी आवश्यकतानुसार किसी भी समय सत्य की खोज कर सकता है।
वैज्ञानिक पद्धति के चरण
(Steps of Scientific Method)
वैज्ञानिक पद्धति क्या है इसके प्रमुख चरणों की व्याख्या कीजिए। वैज्ञानिक पद्धति का लक्ष्य सत्य की खोज करना है। परन्तु इस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए कई स्तरों से गुजरना पड़ता है। वैज्ञानिक अध्ययन में आरम्भ से अन्त तक अत्यन्त सुनिश्चित व व्यवस्थित ढंग से कार्य करना पड़ता है। इन्ही स्तरों को वैज्ञानिक पद्धति के चरण कहा जाता है। इन वरणों को विभिन्न विद्वानों में मामूली हेर-फेर के साथ अपने-अपने ढंग से प्रस्तुत किया है।
तुण्डबर्ग ने वैज्ञानिक पद्धति के चार चरण-
(1) कार्यशील प्राक्कल्पना का निर्माण (ii) अवलोकन तथा तथ्यों का अवलोकन, (iii) संकलित तथ्यों का वर्गीकरण व संगठन तथा (iv) सामान्यीकरण बतलाए है। इसी प्रकार, पी. वी. यंग ने वैज्ञानिक पद्धति के ५ चरणों (1) अध्ययन के लिए समस्या का चुनाव, (ii) कार्यशील प्राक्कल्पमा यथा निर्माण, (11) वैज्ञानिक प्रविधियों की सहायता से समस्या या घटना का अवलोकन च खोज, (iv) संकलित तथ्यर्थों का आलेखन, (२) तथ्यों का विभिन्न वर्गों में वर्गीकरण तया (vi) वैज्ञानिक सामान्यीकरण को सम्मिलित किया है।
उपर्युक्त विवेधशा के आधार पर यहाँ हम वैज्ञानिक पद्धति के विभिन्ण चरणों का विवरण निम्म प्रकार प्रस्तुत कर सकते हैं-
(1) समस्या का चुनाव (Selection of problem) वैज्ञानिक पद्धति के अन्तर्गत सत्य की खोज के लिए सबसे पहले उस समस्या का चुनाव करते हैं, जिसकी हमें खोज करनी है, जैसे-गरीबी की समस्या, बेरोजगारी की समस्या, जनसंख्या वृद्धि की समस्या आदि।
(2) अध्ययन के उद्देश्यों का निर्धारण (Determination of objects of study) समस्या के चुनाव के बाद अध्ययन के उद्देश्यों का निर्धारण किया जाता है। उदाहरणार्थ, बेरोजगारी की समस्या का चुनाव करने के बाद शोधकर्ता बेरोजगारी से सम्बन्धित अध्ययन के उद्देश्य निर्धारित करेगा।
(3) प्राक्कल्पना का निर्माण (Formulation of hypothesis) वैज्ञानिक अध्ययन कोई सरल कार्य नहीं है। इसका सम्बन्ध प्रायः जटिल घटनाओं से होता है। इसलिए शोधकर्ता अपने अध्ययन विषय के सम्बन्ध में पहले से ही सामान्य ज्ञान के आधार पर कुछ अनुमान या निष्कर्ष निकाल लेता है। इन्हीं पूर्व अनुमानों को प्राक्कल्पना या उपकल्पना कहते हैं।
(4) अध्ययन-क्षेत्र तथा अध्ययन की इकाई का निर्धारण (Determination of field and unit of study) प्राक्कल्पना का निर्माण हो जाने पर अध्ययन क्षेत्र और अध्ययन की इकाई तथा उसके लक्ष्य निश्चित हो जाते हैं।
(5) अध्ययन पद्धतियों तथा यन्त्रों का चुनाव (Selection method of study and tools) अध्ययन-क्षेत्र निर्धारित हो जाने के बाद तथ्यों के संकलन के लिए अध्ययन पद्धति का चुनाव किया जाता है। उन स्रोतों का पता लगाया जाता है, जहाँ से अध्ययन के लिए अपेक्षित सामग्री मिल सके। इसके लिए ऐतिहासिक स्रोतों तथा क्षेत्रीय स्रोतों को दूँझ जाता है।
(6) अवलोकन तथा तथ्यों का सकलन (Observation and collection of facts) वास्तविक अवलोकन द्वारा तथ्यों का संकलन किसी भी वैज्ञानिक अध्ययन का एक अनिवार्य अंग है। वास्तविक अवलोकन या निरीक्षण करने से पहले पक्षपात रहित होकर उन तथ्यों का चुनाव कर लेना आवश्यक होता है जो हर सम्भव रूप में प्राक्कल्पना की सत्यता या असत्यता को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त हो।
(7) तथ्यों का वर्गीकरण, विश्लेषण तथा व्याख्या (Classification, analysis and explana tion of facts) केवल तथ्यों के संकलन कर लेने से ही हम किसी भी वैज्ञानिक निष्कर्ष तक नहीं पहुँच सकते। इसके लिए यह आवश्यक है कि हम तथ्यों का वर्गीकरण, विश्लेषण तथा उसकी व्याख्या करें। शोधकर्ता द्वारा किए जाने वाले वर्गीकरण की प्रकृति उसकी अपनी अन्तर्दृष्टि, अनुभव, योग्यता, अध्ययन का उद्देश्य और तथ्यों की पूर्णता व ययार्थता पर निर्भर करेगी।
(8) सामान्यीकरण (Generalization) - वैज्ञानिक पद्धति में सामान्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। वैज्ञानिक पद्धति विज्ञान की सभी शाखाओं में सामान्य होती है। कार्ल पियर्सन के अनुसार, "वैज्ञानिक पद्धति सभी शाखाओं में एक जैसी होती है।"
(9) जाँच या पुनर्परीक्षण (Checking or re-examination) वैज्ञानिक पद्धति में प्राप्त निष्कर्ष की किसी भी समय जाँच की जा सकती है। वैज्ञानिक पद्धति पुनर्परीक्षा की कसौटी पर सदा खरी उतरती है।
(10) भविष्यवाणी (Future prediction) - वैज्ञानिक पद्धति की सहायता से किसी भी घटना के कार्य-कारण सम्बन्धों को जाना जा सकता है और यह सम्बन्ध स्पष्ट होते ही उस घटना की भविष्य-गतिविधि के विषय में संकेत करना सरल हो जाता है। इस प्रकार वैज्ञानिक पद्धति के इस चरण में प्राप्त निष्कर्ष की भविष्यवाणी की जा सकती है।
इन विषयों पर ऐसे प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैः-
- वैज्ञानिक पद्धति क्या है इसके प्रमुख चरणों का वर्णन कीजिए?
- वैज्ञानिक विधि क्या है इसके मुख्य चरणों को स्पष्ट कीजिए?
- वैज्ञानिक विधि का चरण कौन सा है?
- वैज्ञानिक व्याख्या क्या है इसकी विभिन्न रूपों की व्याख्या करें?
- वैज्ञानिक शोध क्या है वैज्ञानिक शोध के विभिन्न चरणों की व्याख्या कीजिए?
- वैज्ञानिक चर्चा क्या है?
- वैज्ञानिक पद्धति का पहला चरण कौन सा था?
- विज्ञान की सरल परिभाषा क्या है?
- वैज्ञानिक विधि के जनक कौन थे?
- वैज्ञानिक पद्धति में परिकल्पना का क्या महत्व है?
- अवैज्ञानिक व्याख्या क्या है?
- वैज्ञानिक का निर्माण क्या होता है?
- वैज्ञानिक पद्धति क्या है इसके विभिन्न चरणों का वर्णन करें?
- वैज्ञानिक विधियों की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
- परिकल्पना क्या है इसके प्रकारों को समझाइए?
- वैज्ञानिक से आप क्या समझते हैं?
- विधि अध्ययन का पहला चरण क्या है?
- वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया किससे शुरू होती है?
- वैज्ञानिक विधि क्या है इसके प्रमुख चरण लिखिए?
- वैज्ञानिक व्याख्या क्या है?
- शोध के प्रमुख चरण कौन से हैं?
- वैज्ञानिक पद्धति की सीमा क्या है?
- पद्धति से आप क्या समझते हैं?
- वैज्ञानिक का जन्म कब हुआ था?
- वैज्ञानिक परिणामों पर चर्चा कैसे करें?
- वैज्ञानिक बनने के आवश्यक गुण क्या हैं?
0 टिप्पणियाँ
please do not inter any spam link in the comment box.
Emoji