Wagner's law of increasing state activities वैगनर के नियम

Wagner's law of increasing state activities

 

Wagner's law

वैगनर के 'राज्य के कार्यों में वृद्धि का नियम' की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए। [Critically examine 'Wagner's law of increasing state activities'] Wagner's law of increasing state activities

अथवा

'वैगनर के नियम' से आप क्या समझते हैं? इनके अनुसार लोक व्यय में वृद्धि के प्रमुख कारणो पर प्रकाश डालिए।

[वैगनर के नियम से आप क्या समझते हैं? इस सिद्धांत के अनुसार सार्वजनिक व्यय में वृद्धि के महत्वपूर्ण कारणों की व्याख्या करें]

अथवा

वैगनर के नियम के आधार पर लोक व्यय में वृद्धि के कारणों की जाँच कीजिए। [Examine the growth of public expenditure on the basis of Wagner's law.)

उत्तर-

एडोल्फ वैगनर
(एडोल्फ वैगनर)

Wagner's law of increasing state activities एक प्रसिद्ध जर्मन अर्थशास्त्री थे, जिन्होंने जर्मन के ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर 'राज्य के कार्यों में वृद्धि का नियम को प्रतिपादित किया वा। इसी नियम को वैगनर का नियम कहा जाता है। वैगनर (Wagner) के अनुसार, "विभिन्न देशों और विभिन्न समयों की विशद तुलना यह स्पष्ट करती है कि सभी स्तर की सरकारों (केन्द्रीय और राज्य सरकारों) के क्रियाकलापों में नियमित रूप से वृद्धि होने की प्रवृत्ति निहित होती है। यह वृद्धि गहन तथा व्यापक दोनों प्रकार की होती है। केन्द्रीय तथा राज्य सरकारें लगातार नये कार्य अपनाती हैं तथा नये पुराने दोनों कार्यों को वे अधिक पूर्णता और कुशलता के साथ करती हैं।"Wagner's law of increasing state activities

एफ.एस. निट्टी (F.S. Nitti) ने वैगनर के नियम का समर्थन करते हुए यह निष्कर्ष निकाला या कि "सभी प्रकार की सरकारों के सार्वजनिक व्यय में वृद्धि की प्रवृत्ति निहित है चाहे वह केन्द्र सरकार हो अथवा राज्य सरकार, शान्तिकाल हो या युद्धकाल, छोटी सरकार हो या बड़ी सरकार।" 

वैगनर नियम के लागू होने के कारण (Causes of Application of Wagner's Law) के अनुसार, लोक व्ययों में वृद्धि के प्रमुख कारण निम्न है-

वैगनर के नियम 

(1) Wagner's law of increasing state activities सरकार के परम्परागत कार्यक्षेत्र का विस्तार (Extention of the Traditional Work Area of the Government) सरकार के परम्परागत कार्यक्षेत्र का निरन्तर विस्तार होता रहता है। सुरक्षा, आन्तरिक प्रशासन एवं न्याय व्यवस्था सरकार के तीन प्रमुख परम्परागत कार्य होते हैं। समय के साथ-साथ इन कार्यों के क्षेत्र में विस्तार होता रहता है तथा सरकार की इन कार्यों में कुशलता लाने के लिए कुशल कर्मचारियों एवं अधिक महँगे उपकरणों का उपयोग करना होता है जिससे सार्वजनिक व्यय में वृद्धि हो जाती है। इस कारण को सार्वजनिक व्यय में वृद्धि का गहन कारण कहा जाता है।

 (2) सरकारी गतिविधियों का विस्तार (Extention of the Government Activities)- सरकार के क्रियाकलापों का निन्तर विस्तार होता रहता है। वह अपने परम्परावादी कार्यों के अतिरिक्त आर्थिक, सामाजिक एवं कल्याणकारी क्रियाओं के संचालन के भी अनेक कार्य करती है, जैसे-रोजगार एवं उत्पादन में वृद्धि लाने के लिए उत्पादकों को वित्तीय सहायता प्रदान करना तथा जनकल्याण हेतु शिक्षा, स्वास्थ्य एवं यातायात आदि की सुविधा उपलब्ध कराना आदि। इस प्रकार के कार्य करने से सार्वजनिक व्यय में वृद्धि हो जाती है। इस कारण को सार्वजनिक व्यय में वृद्धि का व्यापक या विस्तृत कारण कहा जाता है।

(3) सार्वजनिक वस्तुओं के क्षेत्र का विस्तार (Extention of the Scope of Public Goods)- कुछ सार्वजनिक वस्तुएँ ऐसी होती है, जिनको प्रदान करने की जिम्मेदारी सरकार की होती है। इन वस्तुओं के अभाव में अर्थव्यवस्था और जनता दोनों ही दुर्बलता के कुचक्र में फंसे रहते हैं। इन वस्तुओं की संख्या में निरन्तर वृद्धि होती रहती है जिसके कारण भी सार्वजनिक व्यय में निरन्तर वृद्धि होती रहती है।

 

चैगनर के नियम की विशेषताएँ
(वैगनर के नियम की विशेषताएँ)

वैगनर के निवम की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं-

(1) ऐतिहासिक अनुभव पर आधारित (Based on Historic Experience)- वैगनर का नियम जर्मनी के ऐतिहासिक अनुभव पर आधारित है। यह कोई मनगढ़न्त अथवा अन्तर्विश्लेषणात्मक सिद्धान्त नहीं है।

(2) जनहितकारी सरकारों पर लागू (Applicable on the Welfare States) वैगनर के इस सिद्धान्त में उन मजबूरियों का वर्णन नहीं है जिनके कारण सरकार को अपने कार्य क्षेत्र को बढ़ाना अनिवार्य हो जाता है बल्कि उनका सिद्धान्त उन कल्याणकारी सरकारों पर लागू होता है जो जनता के हित के लिए अपनी जिम्मेदारी समझती है तथा उनको पूरा करती है।

(3) दीर्घकाल में लागू (Applicable in the Long Terms) वैगनर का नियम दीर्घकाल में लागू होता है। यदि किसी सरकार का अल्पकाल में व्यय घट जाए तो इस तथ्य की यह नियम व्याख्या नहीं करता। इस नियम के अनुसार सार्वजनिक व्यय में दीर्घकाल में सदैव ही बढ़ने की प्रवृत्ति पाई जाती है।

(4) सार्वजनिक व्यय में वृद्धि की गुणात्मक व्याख्या (Qualitative Explanation of the Increase in Public Expenditure)- वैगनर के सार्वजनिक व्यय में वृद्धि की गुणात्मक व्याख्या की है अर्थात् उन्होंने यह बताया है कि समय के साथ-साथ सार्वजनिक व्यय में वृद्धि होना निश्चित हो किन्तु कितनी वृद्धि होगी यह तथ्य उनका अध्ययन क्षेत्र नहीं है।

वैगनर के नियम की आलोचना (Criticism of Wagner' Law)

वैगनर के नियम की आलोचना के प्रमुख विन्दु अग्र हैं-

(1) वैगनर ने अपने नियम में सार्वजनिक व्यय में वृद्धि के केवल तीन कारणों पर ही प्रकाश डाला है जबकि इनके अतिरिक्त अनेक तत्व ऐसे हैं, जिनके कारण भी सार्वजनिक व्यय में तीव्र वृद्धि होती है। ऐसे तत्वों में प्रमुख तत्व जनसंख्या के आकार में वृद्धि, शहरीकरण, कीमतों में निरन्तर वृद्धि तवा राष्ट्रीय आय और जीवन-स्तर में वृद्धि है।

(2) वैगनर ने सार्वजनिक व्यय में वृद्धि की केवल गुणात्मक व्याख्या की है। उन्होंने यह नहीं बताया है कि सार्वजनिक व्यय की वृद्धि की दर क्या होगी? राष्ट्रीय आय में वृद्धि तथा सार्वजनिक व्यय में वृद्धि के मध्य क्या सम्बन्ध होगा ?

(3) वैगनर ने सार्वजनिक व्यय में वृद्धि की केवल दीर्घकालिक व्याख्या की है। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अल्पकाल में सार्वजनिक व्यय को प्रभावित करने वाले तत्व या घटक कौन-कौन से होते हैं ?

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